परामारिबो/नई दिल्ली: भारत और सूरीनाम के कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विदेश मंत्री S. Jaishankar सूरीनाम दौरे पर पहुंचे। राजधानी परामारिबो में उन्होंने कहा कि भारत सूरीनाम को सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि “परिवार” के रूप में देखता है।

विदेश मंत्री ने ‘टाइम्स ऑफ सूरीनाम’ में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि दोनों देशों के रिश्ते अब व्यापार, बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक सहयोग तक मजबूत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत और सूरीनाम के संबंध पारिवारिक बंधनों से जुड़े हैं और वर्षों से दोनों देशों के बीच विश्वास लगातार बढ़ा है।
जयशंकर ने बताया कि भारत की सहायता से सूरीनाम में कई अहम परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इनमें 161 केवी विद्युत ट्रांसमिशन लाइन, जल पंपिंग स्टेशन, बिजली ढांचे का उन्नयन और चेतक हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले वर्ष सूरीनाम को खाद्य सुरक्षा के लिए करीब 425 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत समर्थित परियोजनाओं के तहत बाढ़ चेतावनी प्रणाली, स्टेडियम, शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर काम किया जा रहा है। दौरे के दौरान जयशंकर भारतीय सहायता से बनी पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन भी करेंगे, जिससे स्थानीय किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी भारत और सूरीनाम का रुख काफी हद तक समान है। विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों पर दोनों देश एकमत हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और बिग कैट एलायंस जैसी भारतीय पहलों में सूरीनाम की भागीदारी की भी सराहना की।
जयशंकर ने कहा कि भारत और सूरीनाम का रिश्ता 1873 में ‘लल्ला रूख’ जहाज से पहुंचे भारतीयों के साथ शुरू हुआ था। आज सूरीनाम में भारतीय मूल का समुदाय वहां की संस्कृति और समाज का अहम हिस्सा बन चुका है। सरनामी हिंदुस्तानी भाषा, बैठक संगीत, दिवाली और फागवा जैसे त्योहार आज भी दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ते हैं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सूरीनाम ने 2003 में विश्व हिंदी सम्मेलन की मेजबानी कर हिंदी भाषा को वैश्विक मंच देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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