देशभर के लाखों कर्मचारियों की भविष्य निधि (PF) बचत को लेकर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने बड़ा फैसला लिया है। EPFO ने प्राइवेट और छूट प्राप्त PF ट्रस्ट्स के लिए नए सख्त नियम लागू करते हुए नई SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी प्राइवेट ट्रस्ट कर्मचारियों को मनमाने तरीके से ब्याज नहीं दे सकेगा। EPFO ने ब्याज दर की अधिकतम सीमा EPFO की दर से 2% यानी 200 बेसिस पॉइंट्स तक तय कर दी है।
32 लाख कर्मचारियों की बचत पर असर
देश में करीब 1250 से अधिक प्राइवेट PF ट्रस्ट हैं, जो लगभग 32 लाख कर्मचारियों के 3.50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के फंड को मैनेज करते हैं। EPFO ने साफ कहा है कि इन ट्रस्ट्स को कर्मचारियों को वही सुविधाएं देनी होंगी जो EPFO देता है या उससे बेहतर लाभ उपलब्ध कराने होंगे।
नियम तोड़े तो खत्म होगी छूट
EPFO के अनुसार यदि कोई प्राइवेट ट्रस्ट नए नियमों का पालन नहीं करता है तो उसकी “छूट प्राप्त संस्था” की मान्यता रद्द की जा सकती है।
प्राइवेट या छूट प्राप्त संस्थान वे कंपनियां होती हैं जो कर्मचारियों के PF पैसे को EPFO के केंद्रीय फंड में जमा करने की बजाय अपना अलग PF ट्रस्ट चलाती हैं।
निष्क्रिय खातों पर भी सख्ती
नई SOP के मुताबिक जिन खातों में KYC पूरी नहीं है या लंबे समय से निष्क्रिय पड़े हैं, उनका पैसा ब्याज सहित EPFO को ट्रांसफर करना होगा। इससे कर्मचारियों के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
क्यों लिया गया फैसला?
सूत्रों के मुताबिक कुछ सरकारी और निजी कंपनियां अपने कर्मचारियों को 30% से 34% तक बेहद ज्यादा ब्याज दे रही थीं। EPFO का मानना है कि इससे भविष्य में वित्तीय असंतुलन पैदा हो सकता है। इसी वजह से अब ब्याज सीमा तय की गई है।
इन बड़ी कंपनियों पर भी लागू होंगे नियम
EPFO की सूची के अनुसार कई बड़ी कंपनियां अपने PF ट्रस्ट संचालित करती हैं, जिनमें Infosys, Wipro, Reliance Industries, Larsen & Toubro, NTPC Limited और Indian Oil Corporation जैसी कंपनियां शामिल हैं।
क्या होगा कर्मचारियों पर असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से कर्मचारियों की PF राशि ज्यादा सुरक्षित होगी और सभी ट्रस्ट्स के लिए एक समान पारदर्शी व्यवस्था लागू हो सकेगी। हालांकि, कुछ कर्मचारियों को पहले की तुलना में कम ब्याज मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
