“बेटा नहीं मिला, लेकिन उम्मीद अब भी ज़िंदा है” — नजीब की मां फातिमा नफीस का दर्

 जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी को 9 साल पूरे हो गए, लेकिन इस रहस्यमयी केस का आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। दिल्ली पुलिस से लेकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI तक ने अपनी जांच की, लेकिन नतीजा शून्य निकला। अब सीबीआई ने केस बंद कर दिया है, जिसे दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भी मंजूरी दे दी।

लेकिन इस फैसले के बाद भी मां फातिमा नफीस की आंखों में आंसू हैं और दिल में उम्मीद बाकी है।

“मैं आज भी इंतज़ार कर रही हूं… मेरा बेटा कभी तो लौटेगा,” उन्होंने एक पुराने फोटो को देखते हुए कहा।

कौन था नजीब अहमद?

*उम्र: 27 वर्षकोर्स:

*एमएससी बायोटेक्नोलॉजीयूनिवर्सिटी: JNU, नई दिल्ली

*आखिरी बार देखा गया: 15 अक्टूबर 2016, JNU कैंपस में

उस रात ABVP और अन्य छात्रों के बीच टकराव की खबरें आई थीं, जिसके बाद से नजीब लापता हो गया।
तब से लेकर आज तक एक भी पुख्ता सुराग नहीं मिला — न कोई कॉल, न लोकेशन, न शव।

क्या हुआ जांच में?

दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच, और फिर CBI ने केस की जांच कीपरिवार ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटायाCBI ने 2021 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, लेकिन परिवार के विरोध के चलते कोर्ट ने तब इसे मंजूरी नहीं दीअब, 30 जून 2025 को कोर्ट ने केस बंद करने को मंजूरी दे दी, यह कहते हुए कि

“जांच में सभी संभावनाओं को देखा गया, लेकिन कोई विश्वसनीय सबूत नहीं मिला।”

परिवार का क्या कहना है?

फातिमा नफीस, जो इन नौ वर्षों से इंसाफ के लिए सड़क से कोर्ट तक लड़ाई लड़ रही हैं, ने कहा:

“CBI ने केस को दबाया है। अगर वो चाहते, तो सच सामने आ सकता था।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह राजनीतिक दबाव का मामला है।

सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं:

1-क्या नजीब की गुमशुदगी राजनीतिक या वैचारिक टकराव से जुड़ी थी?

2-क्या जांच एजेंसियों ने सभी पहलुओं को निष्पक्ष रूप से देखा?

3-क्या 9 सालों में तकनीक की मदद से भी कोई सुराग नहीं मिलना किसी चूक की ओर इशारा नहीं करता?

नजीब अब सिर्फ एक नाम नहीं, एक प्रतीक बन चुका है

JNU के छात्रों और देशभर के युवाओं के लिए नजीब अहमद सिर्फ एक गुमशुदा छात्र नहीं, बल्कि न्याय की तलाश का प्रतीक बन चुका है।
हर साल उसकी याद में प्रदर्शन, कैंडल मार्च और सोशल मीडिया पर अभियान चलते हैं।

क्या नजीब को इंसाफ मिलेगा?

CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने भले ही फाइल बंद कर दी हो, लेकिन फातिमा नफीस जैसे लाखों लोगों के मन में यह सवाल अब भी ज़िंदा है:

“क्या भारत में कोई इंसान यूं ही गायब हो सकता है, और सालों तक कोई जवाब नहीं मिलेगा?”

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