उपराष्ट्रपति चुनाव: NDA ने खोले पत्ते, विपक्ष आज करेगा उम्मीदवार का ऐलान; 3 नाम सबसे आगे चर्चा में

उपराष्ट्रपति पद का चुनाव इस बार भारतीय राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ लेकर आया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सबसे पहले चाल चलते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। लेकिन विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। आज दोपहर बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जहां सभी विपक्षी दलों की सहमति से एक साझा उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी।

NDA का दांव: अनुभव और संगठनात्मक पकड़

NDA ने इस बार एक संगठित, अनुभवी और दक्षिण भारत से जुड़े चेहरे को सामने लाकर अपनी रणनीति साफ कर दी है। सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव भाजपा और सहयोगियों के लिए ताकतवर साबित हो सकता है। दिल्ली पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया और इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपनी औपचारिक चुनावी तैयारी का आगाज भी कर दिया।

भाजपा की रणनीति साफ है – विपक्ष के भीतर चल रहे मतभेदों का फायदा उठाकर उपराष्ट्रपति पद पर अपनी पकड़ मजबूत करना।

विपक्ष की तैयारी: संविधान की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश

इंडिया ब्लॉक का मकसद सिर्फ उम्मीदवार खड़ा करना नहीं है, बल्कि इस चुनाव को “लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जंग” के रूप में पेश करना है। यही वजह है कि विपक्ष ऐसे नाम तलाश रहा है जो सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक और सामाजिक संदेश भी दें।

चर्चा में तीन बड़े नाम:

1-मैलस्वामी अन्नादुरई

  • इसरो के पूर्व वैज्ञानिक और चंद्रयान-1 मिशन के प्रमुख।
  • विपक्ष उन्हें विज्ञान और आधुनिक भारत के प्रतीक के रूप में पेश करना चाहता है।
  • उनके आने से तकनीकी और शैक्षणिक वर्ग का समर्थन मिलने की संभावना।

2-तिरुचि सिवा

  • डीएमके के वरिष्ठ सांसद और तमिलनाडु की राजनीति में मजबूत चेहरा।
  • संसद में अपनी सक्रियता और धारदार वक्तृत्व के लिए प्रसिद्ध।
  • यदि विपक्ष उन्हें उतारता है, तो दक्षिण भारत में राजनीतिक संदेश जाएगा कि भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सकती है।

3-तुषार गांधी

  • महात्मा गांधी के परपोते और इतिहासकार।
  • विपक्ष उन्हें भाजपा के खिलाफ एक वैचारिक चुनौती के रूप में पेश करना चाहता है।
  • उनका नाम गांधी परिवार की विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों को जोड़कर देखने का संदेश देगा।

इसके साथ ही सूत्रों के मुताबिक विपक्ष महाराष्ट्र से किसी दलित बुद्धिजीवी का नाम भी विचार कर रहा है, ताकि चुनाव में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का बड़ा नैरेटिव खड़ा किया जा सके।

पृष्ठभूमि: क्यों है उपराष्ट्रपति चुनाव अहम?

भारत में उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं और सदन की कार्यवाही पर उनका बड़ा असर होता है। मौजूदा राजनीतिक माहौल में, जहां संसद में तीखी नोकझोंक और टकराव देखने को मिलते हैं, विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही एक मजबूत और स्वीकार्य चेहरा लाना चाहते हैं।

  • NDA का मकसद: संसद में विधायी कार्यवाही को अपने पक्ष में मोड़ना।
  • विपक्ष का मकसद: इस चुनाव को वैचारिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की जंग के रूप में दिखाना।

आगे की राह:

  • NDA ने अपने उम्मीदवार का ऐलान कर विपक्ष पर दबाव बढ़ा दिया है।
  • INDIA ब्लॉक आज उम्मीदवार घोषित करेगा।
  • यह चुनाव सिर्फ पद का नहीं बल्कि राजनीतिक विचारधारा, सामाजिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।