बिना अनुमति लगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर उपभोक्ताओं ने आयोग में चुनौती दी, बिलों में बढ़ोतरी की शिकायत

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने को लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी बढ़ रही है। बिलों में बढ़ोतरी, पुराने बिल का समायोजन न होना और सहमति के बिना मीटर बदलना जैसी शिकायतों के कारण राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे नियामक आयोग में कानूनी चुनौती दी है।

क्या है मामला?

  • स्कूल और घरों में बिना जिम्मेदार की मौजूदगी, पुराना मीटर उखाड़कर नया स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया गया।
  • उपभोक्ताओं का दावा है कि मीटर तेज चल रहा है, बिजली का लोड जंप हो रहा है और पुराने बिल का समायोजन नहीं किया गया।
  • कई उपभोक्ताओं को प्रीपेड मोड में चलने के बावजूद दरों में कोई रियायत नहीं मिली।

उपभोक्ताओं की शिकायतें

  • बीएन मिश्र, ब्लू स्टार मॉन्टेसरी स्कूल प्रबंधक: “जब मीटर प्रीपेड मोड में चला, तब से खर्च बढ़ गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं मिला।”
  • विनोद कुमार, गोमतीनगर: “मेरी अनुमति के बिना मीटर बदल दिया गया। पुराने बिल का समायोजन नहीं हुआ।”

कानूनी और तकनीकी पहल

  • उपभोक्ता परिषद का कहना है कि विद्युत अधिनियम-2003 के अनुसार, उपभोक्ता का विकल्प है कि वह स्मार्ट प्रीपेड मीटर या पोस्ट-पेड मीटर लगाए।
  • आयोग से याचिका में मांग की गई कि बिना सहमति मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए
  • परिषद ने मीटर की गुणवत्ता और परीक्षण पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि चीन में बने कंपोनेंट का इस्तेमाल किया गया है।

अन्य राज्यों में विरोध

  • बिहार, महाराष्ट्र और असम में भी उपभोक्ताओं ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर का विरोध किया।
  • केंद्र सरकार ने निर्देश दिए थे कि 5% पुराने मीटर की जाँच जारी रखी जाए और स्मार्ट मीटर से बिलिंग डेटा का मिलान किया जाए।

ऊर्जा मंत्रालय की प्रतिक्रिया

  • ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली चोरी रोकी जा सकेगी, विजिलेंस सक्रिय होगा और पारदर्शी बिलिंग सुविधा मिलेगी।
  • 50% से अधिक लाइन लॉस वाले फीडरों पर प्राथमिकता के आधार पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।

उपभोक्ता परिषद की याचिका और उपभोक्ताओं की बढ़ती नाराजगी के बाद यह मामला विद्युत नियामक आयोग में बड़ा चर्चा का विषय बन गया है।

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