नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर सहित देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और उनके साथ कथित भेदभाव के मुद्दे पर अहम सुनवाई शुरू कर दी है। इस मामले की सुनवाई नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ कर रही है, जो इस विषय के दायरे और सीमाओं को तय करेगी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे तय समय सीमा का सख्ती से पालन करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य महत्वपूर्ण मामलों के लंबित होने के कारण इस मामले में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह मामला मुख्य रूप से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है, लेकिन इसके साथ ही अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के अधिकार और समानता के मुद्दे भी इससे जुड़े हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई न केवल धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े सवालों को संबोधित करेगी, बल्कि संविधान में दिए गए समानता के अधिकार की व्याख्या भी करेगी। इस फैसले का असर देशभर के कई धार्मिक स्थलों की परंपराओं पर पड़ सकता है।
फिलहाल, सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की इस अहम सुनवाई पर टिकी हैं, जो भविष्य में धार्मिक अधिकारों और लैंगिक समानता के बीच संतुलन तय कर सकती है।
