ईरान-अमेरिका सीजफायर पर पाक पीएम शहबाज शरीफ विवादों में, ‘कॉपी-पेस्ट’ मैसेज से घिरे सवाल

 

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन:
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक नए विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें “कॉपी-पेस्ट” मैसेज पोस्ट करने के आरोपों के चलते जमकर ट्रोल किया जा रहा है।

दरअसल, शहबाज शरीफ के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से एक ऐसा संदेश पोस्ट हुआ, जिसमें “Draft – Pakistan’s PM Message on X” लिखा हुआ था। इससे यह संकेत मिला कि यह एक ड्राफ्ट मैसेज था, जिसे गलती से सार्वजनिक कर दिया गया। हालांकि बाद में पोस्ट को डिलीट कर संशोधित रूप में दोबारा शेयर किया गया, लेकिन तब तक उसका स्क्रीनशॉट वायरल हो चुका था।


क्या था ड्राफ्ट मैसेज में?
वायरल ड्राफ्ट मैसेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर संभावित हमलों को दो हफ्ते तक टालने की अपील की गई थी। इसमें कूटनीति को मौका देने और ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का अनुरोध भी शामिल था।

सामग्री सामान्य कूटनीतिक बयान जैसी थी, लेकिन “Draft” शब्द के सार्वजनिक रूप से दिखने के कारण पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।


सोशल मीडिया पर उठे सवाल
मैसेज वायरल होते ही पत्रकारों और यूजर्स ने कई सवाल उठाए। कुछ ने पूछा कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक संदेश में “Draft” टैग कैसे रह गया। वहीं, पत्रकार रायन ग्रिम ने भी इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह असामान्य है कि कोई टीम अपने ही प्रधानमंत्री को “Pakistan’s PM” लिखकर संबोधित करे।

कई यूजर्स ने यह भी शक जताया कि यह मैसेज संभवतः पाकिस्तान के बाहर तैयार किया गया हो सकता है। हालांकि, अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है।


नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान में एक और बहस छिड़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर को यह विश्वास है कि उन्होंने ईरान-अमेरिका के बीच शांति स्थापित कराने में भूमिका निभाई है।

इसी आधार पर उनके समर्थक नोबेल शांति पुरस्कार की मांग उठा रहे हैं। कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCCI) ने भी दोनों नेताओं के लिए यह मांग रखी है, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।


सीजफायर पर अभी भी अनिश्चितता
हालांकि, ईरान-अमेरिका सीजफायर को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। ईरान की कई शर्तों को अमेरिका ने अस्वीकार कर दिया है। वहीं, लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार ने उम्मीद जताई है कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में संभावित शांति वार्ता हो सकती है। सुरक्षा कारणों से राजधानी में दो दिन का अवकाश भी घोषित किया गया है।


एक ओर जहां पाकिस्तान खुद को कूटनीतिक भूमिका में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं ‘ड्राफ्ट मैसेज’ विवाद ने उसकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें संभावित वार्ता और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।

 

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