परिसीमन पर टकराव तेज: स्टालिन का ‘काला झंडा’ ऐलान, केंद्र को दी कड़ी चेतावनी

चेन्नई | आवाज़ प्लस

तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) को लेकर घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ बड़ा ऐलान करते हुए 16 अप्रैल को पूरे राज्य में काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर केंद्र ने तमिलनाडु की आवाज को नजरअंदाज किया, तो उसे “भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी।

🔴 “हमारे सिर पर लटकी तलवार अब गिर चुकी है”

द्रमुक (DMK) प्रमुख स्टालिन ने पार्टी सांसदों और जिला सचिवों के साथ आपात बैठक के बाद कहा कि परिसीमन अब सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं बल्कि “सीधा खतरा” बन चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ “घोर ऐतिहासिक अन्याय” है।

⚖️ दक्षिण बनाम उत्तर का मुद्दा?

स्टालिन ने सवाल उठाया कि क्या देश की प्रगति में योगदान देने वाले दक्षिणी राज्यों को “सजा” दी जा रही है?
उनका कहना है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो सकती है, जबकि उत्तरी राज्यों को अनुचित बढ़त मिल सकती है।

⚠️ “भाजपा आग से खेल रही है”

मुख्यमंत्री ने केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा:

“भाजपा आग से खेल रही है। अगर हमारी आवाज नहीं सुनी गई, तो परिणाम गंभीर होंगे।”

उन्होंने पूरे तमिलनाडु में घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे लगाने की अपील की, जिसे एक प्रतीकात्मक लेकिन बड़े जनआंदोलन की शुरुआत माना जा रहा है।

🤝 राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश

स्टालिन ने बताया कि द्रमुक अन्य राज्यों और विपक्षी दलों से संपर्क कर रही है।
उन्होंने देशभर के सांसदों और पार्टियों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।

🔥 बड़े आंदोलन के संकेत

स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन हो सकते हैं—इतने व्यापक कि “राज्य ठप पड़ सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश को एक बार फिर 1950-60 के दशक जैसी द्रमुक की आक्रामक राजनीति देखने को मिल सकती है।

📌 राजनीतिक संदेश क्या है?

यह पूरा मुद्दा सिर्फ परिसीमन तक सीमित नहीं है, बल्कि संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकार और उत्तर-दक्षिण राजनीतिक संतुलन जैसे बड़े सवालों को भी सामने ला रहा है।
आने वाले दिनों में यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

(आवाज़ प्लस — सटीक, तेज और भरोसेमंद खबरें)

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