महिला आरक्षण बिल 2026: सीटों का नया गणित, बदल जाएगी राजनीति की तस्वीर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए तीन अहम विधेयक पेश किए हैं। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं। इनका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह लागू करना है, जिससे 2029 से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके।

क्या हैं प्रस्तावित बड़े बदलाव

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इनमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।

इन विधेयकों के लागू होने से चार बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

  • लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू होगा
  • सांसदों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा
  • निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन (परिसीमन) किया जाएगा
  • परिसीमन आयोग का गठन होगा

विपक्ष की आपत्तियां

विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि परिसीमन 2026 की नई जनगणना के बाद होना चाहिए, न कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर। दक्षिण भारतीय राज्यों—तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना—ने भी संभावित सीट असंतुलन को लेकर चिंता जताई है।

सरकार के सामने चुनौती

संविधान संशोधन के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। मौजूदा स्थिति में NDA के पास 292 सीटें हैं, जबकि 360 का आंकड़ा चाहिए। ऐसे में सरकार को बिल पास कराने के लिए विपक्ष के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

सीटों का गणित कैसे बदलेगा

सरकार का दावा है कि सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50% की वृद्धि की जाएगी, ताकि किसी राज्य के साथ अन्याय न हो। उदाहरण के तौर पर—

  • तमिलनाडु: 39 से बढ़कर लगभग 59 सीटें
  • केरल: 20 से बढ़कर 30 सीटें
  • आंध्र प्रदेश: 25 से बढ़कर 37 सीटें

इस फॉर्मूले से सीटों का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

55 साल बाद होगा बड़ा बदलाव

वर्तमान में लोकसभा सीटों का आधार 1971 की जनगणना है, जिसे कई बार बढ़ाया गया। अब 2026 के बाद नई जनगणना और परिसीमन के जरिए देश की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव संभव है।

महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़े ये तीनों विधेयक भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव ला सकते हैं। जहां एक ओर महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर सीटों का नया गणित राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार विपक्ष को साथ लेकर इस संवैधानिक बदलाव को कैसे मंजूरी दिलाती है।

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