उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले से बिजली विभाग की घोर लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां हाईटेंशन लाइन टूटने से करंट की चपेट में आकर 30 वर्षीय महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना सराय अकिल थाना क्षेत्र के इमलीगांव की है, जिसने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में जर्जर बिजली व्यवस्था और विभागीय उदासीनता को उजागर कर दिया है।
खेत जाते वक्त हुआ हादसा
बुधवार को इमलीगांव निवासी कुलदीप कुमार की पत्नी किरन देवी रोज की तरह खेत की ओर जा रही थीं। रास्ते में वीरेंद्र प्रसाद मिश्रा के खेत की मेड़ पर हाईटेंशन विद्युत तार टूटकर जमीन पर गिरा हुआ था, जिसमें लगातार करंट दौड़ रहा था।
अनजान किरन देवी जैसे ही उस तार के संपर्क में आईं, तेज करंट की चपेट में आ गईं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महिला वहीं गिर पड़ी और कुछ ही पलों में उसकी झुलसकर मौत हो गई।
पहले ही दी गई थी शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
मृतका के पति कुलदीप कुमार ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि—
- टूटे हुए तार की सूचना पहले ही बिजली विभाग को दी जा चुकी थी,
- SDO और JE को खतरे की जानकारी होने के बावजूद बिजली सप्लाई बंद नहीं की गई,
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न ही तार की मरम्मत कराई गई।
यदि समय रहते विभाग ने कार्रवाई की होती, तो किरन देवी की जान बच सकती थी।
परिजनों में कोहराम, गांव में आक्रोश
हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जर्जर तार और ढीले खंभे पहले से ही खतरा बने हुए हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।
ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
SDO और JE पर दर्ज हुआ मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। अपर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मृतका के पति की तहरीर पर सराय अकिल थाने में बिजली विभाग के SDO और JE के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि—
- पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है,
- लापरवाही यदि साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बार-बार सामने आ रही बिजली विभाग की लापरवाही
यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर खुले तार, टूटे खंभे और लो-हैंगिंग लाइनें हादसों को दावत देती रहती हैं। इसके बावजूद विभागीय निरीक्षण और समय पर मरम्मत का अभाव बना रहता है।
किरन देवी की मौत ने फिर साबित कर दिया कि प्रशासनिक लापरवाही आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
निष्कर्ष
कौशाम्बी की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता का नतीजा है। अब देखना यह होगा कि दर्ज FIR के बाद जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों को सजा मिलती है या मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
पीड़ित परिवार को न्याय और क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में सुधार—यही इस दर्दनाक घटना से निकला सबसे बड़ा सवाल है।
