कोलकाता/दक्षिण बंगाल | आवाज़ प्लस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में संदेशखाली का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सुंदरबन के मुहाने पर स्थित यह इलाका अब केवल भौगोलिक पहचान तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की सियासत का अहम प्रतीक बन चुका है। खासकर दक्षिण बंगाल की 183 सीटों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

संदेशखाली में जमीन कब्जाने और महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब चुनावी नैरेटिव में बदल चुका है। इस आंदोलन की प्रमुख चेहरा बनीं रेखा पात्रा को भारतीय जनता पार्टी ने हिंगलगंज विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतार दिया है।
संदेशखाली बना सियासी मुद्दा
कभी शांत द्वीप रहा संदेशखाली अब राज्य की राजनीति का प्रतीक बन गया है। यहां महिलाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन ने तृणमूल कांग्रेस सरकार को सीधे निशाने पर ला दिया। बीजेपी इस मुद्दे को ‘नारी शक्ति बनाम सत्ता का अहंकार’ के रूप में पेश कर रही है।
रेखा पात्रा पर बीजेपी का भरोसा
रेखा पात्रा इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में बशीरहाट सीट से उम्मीदवार रह चुकी हैं, हालांकि वे जीत हासिल नहीं कर सकीं। बावजूद इसके, पार्टी ने उन्हें हिंगलगंज से टिकट देकर यह संकेत दिया है कि वह स्थानीय आंदोलनों को राजनीतिक पहचान देने की रणनीति पर काम कर रही है।
तीन स्तर पर असर
संदेशखाली की घटना का दक्षिण बंगाल की राजनीति पर बहुआयामी प्रभाव देखा जा रहा है:
- महिला वोट बैंक में हलचल: राज्य में महिला मतदाता लंबे समय से ममता बनर्जी की मजबूत आधार रही हैं, लेकिन इस घटना ने इस वर्ग में भावनात्मक असंतोष पैदा किया है।
- नैरेटिव की लड़ाई: जहां विपक्ष इसे महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बना रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है।
- स्थानीय नेतृत्व पर असर: शाहजहां शेख जैसे नेताओं पर लगे आरोप और कार्रवाई से जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर की छवि प्रभावित हुई है।
क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?
हालांकि, बंगाल की राजनीति केवल एक मुद्दे पर निर्भर नहीं करती। जातीय समीकरण, संगठनात्मक ताकत, कल्याणकारी योजनाएं और नेतृत्व की लोकप्रियता भी चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
दक्षिण बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की मजबूत पकड़ और भारतीय जनता पार्टी की आक्रामक रणनीति के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
इमोशनल नैरेटिव का इम्तिहान
संदेशखाली अब एक ‘इमोशनल नैरेटिव’ बन चुका है, जो कई सीटों पर मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। हिंगलगंज से रेखा पात्रा की जीत या हार यह तय करेगी कि यह जनआक्रोश केवल मुद्दा बनकर रह जाएगा या सत्ता परिवर्तन का कारण भी बन सकता है।
(आवाज़ प्लस)
