आवाज़ प्लस | विशेष समाचार
नई दिल्ली: महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह “महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन बिल” था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लागू करना चाहती थी, जिसे विपक्ष स्वीकार नहीं कर सकता।
प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिला आरक्षण को लेकर गंभीर है, तो उसे 2023 में पारित कानून को लागू करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के लागू होने पर विपक्ष सरकार का समर्थन करेगा।
बीजेपी का पलटवार, निंदा प्रस्ताव की तैयारी
दूसरी ओर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य विधानसभाओं में विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ “निंदा प्रस्ताव” पारित किया जाए।
संसद सत्र समाप्त, आंकड़ों में प्रदर्शन
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार, 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र में 31 बैठकें हुईं और कुल 151 घंटे 42 मिनट तक कार्यवाही चली। इस दौरान सदन की उत्पादकता 93 प्रतिशत रही।
सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे, लेकिन महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी।
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