कंगाली के दौर में पाकिस्तान में किसान आंदोलन तेज, 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन

📰 आवाज़ प्लस | अंतरराष्ट्रीय समाचार

इस्लामाबाद: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अब किसानों का गुस्सा भी सड़कों पर खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को ‘अंतरराष्ट्रीय किसान संघर्ष दिवस’ के मौके पर देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। पाकिस्तान किसान राबिता कमेटी (PKRC) के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में 100 से अधिक शहरों में किसानों ने भाग लिया और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 4,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन तय करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि बढ़ती लागत और गिरते दामों के कारण खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है, जिससे उनकी आजीविका संकट में पड़ गई है।

कॉरपोरेट खेती का विरोध, निजी कंपनियों पर सवाल

किसानों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित कॉरपोरेट खेती के मॉडल को पूरी तरह खारिज कर दिया। साथ ही बटाईदार किसानों को दिए गए बेदखली नोटिस वापस लेने की मांग की। किसानों का आरोप है कि सरकार गेहूं की खरीद को 11 निजी कंपनियों के हवाले कर छोटे किसानों को कमजोर करने की साजिश कर रही है।

देशभर में उग्र प्रदर्शन

पंजाब प्रांत के लाहौर, मुल्तान, बहावलपुर, साहीवाल और सरगोधा में भारी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे। वहीं सिंध के हैदराबाद, सुक्कुर, लरकाना और ठट्टा में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर, स्वात, एबटाबाद और बन्नू तथा बलूचिस्तान के क्वेटा, मस्तुंग और कलात में भी किसानों ने रैलियां निकालीं।

लाहौर में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए PKRC की महासचिव रिफ्फत मकसूद ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक रहे हैं और सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी कर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र होगा। किसानों का कहना है कि वे पहले ही बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए यह किसान आंदोलन एक नई चुनौती बनकर उभरा है। यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो यह असंतोष बड़े राजनीतिक और आर्थिक संकट का रूप ले सकता है।

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