नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 अप्रैल:
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 2023 के बेंगलुरु जेल कट्टरपंथ मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े मास्टरमाइंड टी. नसीर समेत सात आरोपियों को सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 48,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

दोषियों में टी. नसीर के अलावा सैयद सुहैल खान, मोहम्मद उमर, जाहिद तबरेज, सैयद मुदस्सिर पाशा, मोहम्मद फैसल रब्बानी और सलमान खान शामिल हैं। सभी को IPC, गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया।
जेल के अंदर चल रहा था कट्टरपंथी नेटवर्क
जांच में सामने आया कि टी. नसीर ने बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के भीतर एक संगठित आतंकी नेटवर्क खड़ा किया था। इस नेटवर्क के जरिए जेल में बंद युवाओं की पहचान कर उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता था।
आरोपियों पर युवाओं को बहकाकर उनकी भर्ती करने, उन्हें प्रशिक्षण देने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप सिद्ध हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क का मकसद भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देना था।
हथियार और डिजिटल सबूत बरामद
मामले की शुरुआत जुलाई 2023 में बेंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा की गई कार्रवाई से हुई थी। पुलिस ने आदतन अपराधियों के पास से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण बरामद किए थे।
बाद में यह मामला NIA को सौंपा गया, जिसने जांच के दौरान एक बड़ी साजिश का खुलासा किया।
जेल से भगाने की भी थी साजिश
NIA की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों की योजना टी. नसीर को अदालत ले जाते समय पुलिस कस्टडी से भगाने की थी। उस समय नसीर 2008 के बेंगलुरु सीरियल ब्लास्ट मामले में विचाराधीन कैदी था।
एक आरोपी अब भी फरार
इस मामले में NIA ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि जुनैद अहमद नामक एक आरोपी अब भी फरार है। उसकी तलाश जारी है।
गौरतलब है कि आरोपी सलमान खान को अंतरराष्ट्रीय समन्वय के तहत रवांडा से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था।
NIA की इस कार्रवाई को जेलों के भीतर फैल रहे कट्टरपंथी नेटवर्क पर बड़ी चोट माना जा रहा है। अदालत के इस फैसले से आतंकी गतिविधियों के खिलाफ सख्त संदेश गया है।
