सीतापुर के स्कूल का कमाल: ‘सुपर 30’ बैच से निकले दो-दो यूपी बोर्ड टॉपर, मुफ़्त शिक्षा बना सफलता का मंत्र

सीतापुर:
उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा परिणाम में इस बार सीतापुर के बाबूराम सावित्री देवी इंटर कॉलेज ने शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया है। स्कूल की छात्रा कशिश वर्मा ने हाईस्कूल (10वीं) और शिखा वर्मा ने इंटरमीडिएट (12वीं) में पूरे प्रदेश में टॉप कर इतिहास रच दिया। खास बात यह है कि दोनों छात्राएं स्कूल के निशुल्क ‘सुपर 30’ बैच से जुड़ी रही हैं।

खुशी का डबल मौका

स्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि पहले हाईस्कूल टॉपर की खबर से ही स्कूल में खुशी का माहौल था, लेकिन इंटरमीडिएट में भी टॉप आने की सूचना ने इस खुशी को दोगुना कर दिया। पूरा विद्यालय परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।

‘सुपर 30’ बना सफलता का आधार

स्कूल की सफलता के पीछे ‘सुपर 30’ बैच की बड़ी भूमिका है। इसमें कक्षा 9 से चयनित 30 मेधावी छात्रों को 12वीं तक पूरी तरह मुफ्त शिक्षा दी जाती है।

  • फीस से लेकर बोर्ड परीक्षा तक का खर्च स्कूल उठाता है
  • अलग से विशेष कक्षाएं संचालित होती हैं
  • टॉपर छात्राएं भी इसी बैच का हिस्सा रही हैं

पढ़ाई का अलग मॉडल

प्रिंसिपल के अनुसार, स्कूल का फोकस रटने पर नहीं बल्कि समझने पर है।

  • कक्षा में ही शंकाओं का समाधान
  • भारी होमवर्क के बजाय स्वाध्याय पर जोर
  • तार्किक क्षमता विकसित करने की ट्रेनिंग
  • कोचिंग पर निर्भरता खत्म करने की कोशिश

संसाधनों से ज्यादा सोच जरूरी

ग्रामीण क्षेत्र में होने के बावजूद स्कूल में संसाधनों की कमी नहीं है। चुनौती सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को आगे लाना है, जिसे ‘सुपर 30’ के जरिए पूरा किया जा रहा है।

पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियां भी

टॉपर छात्राएं केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। शिखा वर्मा को डांस और साहित्य में विशेष रुचि है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हुआ।

तनावमुक्त माहौल से बेहतर परिणाम

स्कूल बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालता।

  • नियमित टेस्ट से परीक्षा का डर खत्म
  • लगातार मोटिवेशन
  • सकारात्मक वातावरण

इसी का नतीजा है कि छात्र बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।

छात्रों के लिए संदेश

प्रिंसिपल ने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि

“अगर आप कक्षा में ध्यान से पढ़ते हैं और समझते हैं, तो सफलता आपको जरूर मिलेगी। असफलता से घबराएं नहीं, नया लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ें।”

सीतापुर का यह स्कूल यह साबित करता है कि महंगी शिक्षा नहीं, बल्कि सही दिशा, समर्पण और अवसर ही सफलता की असली कुंजी हैं। ‘सुपर 30’ जैसी पहल देश के अन्य स्कूलों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।

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