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वॉशिंगटन/इस्लामाबाद:अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है। पाकिस्तान पर आरोप लग रहे हैं कि उसने ईरान को वैश्विक व्यापार के लिए छह नए जमीनी मार्ग उपलब्ध कराए हैं, जिससे अमेरिकी नाकेबंदी को कमजोर करने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की उस रणनीति को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसके तहत ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञ Derek J. Grossman ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान का यह कदम ईरान को नाकेबंदी से बचने का रास्ता देता है।
उन्होंने कहा कि इन नए मार्गों के जरिए ईरान:
- अपने तेल व्यापार को जारी रख सकता है
- अमेरिकी दबाव को कम कर सकता है
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग (रूस, चीन आदि) बढ़ा सकता है
‘ट्रंप रणनीति पर सीधा असर’
Donald Trump की नीति ईरान पर आर्थिक दबाव बनाकर उसे बातचीत के लिए मजबूर करने की रही है।
अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर निगरानी और नाकेबंदी इसी रणनीति का हिस्सा है।
लेकिन पाकिस्तान द्वारा जमीनी रास्ते खोलने से:
- समुद्री नाकेबंदी का असर कम हो सकता है
- ईरान को वैकल्पिक व्यापार मार्ग मिल सकते हैं
मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल
पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बताता रहा है। लेकिन इस कदम के बाद उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
- इजरायल पहले ही पाकिस्तान को अविश्वसनीय बता चुका है
- भारत में इजरायली राजदूत Reuven Azar ने भी संदेह जताया था
- ईरान के अधिकारी Ebrahim Rezaei ने पाकिस्तान को पक्षपाती बताया
क्या पाकिस्तान ‘डबल गेम’ खेल रहा है?
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान, चीन और रूस के साथ अपने आर्थिक संबंध भी मजबूत कर रहा है।
यही कारण है कि इस घटनाक्रम को कई विशेषज्ञ “डबल गेम” यानी दोहरी रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
पाकिस्तान के इस कदम ने क्षेत्रीय राजनीति को और जटिल बना दिया है।
अब सवाल यह है कि:
- क्या अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाएगा?
- या फिर यह मामला कूटनीतिक बातचीत से सुलझेगा?
फिलहाल, इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
