तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए बैकडोर बातचीत तेज हो गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौते पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत 30 दिनों तक सैन्य गतिविधियों को रोका जा सकता है और दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में शामिल ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से व्यावसायिक जहाजों के लिए खोला जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती ड्राफ्ट के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव को अस्थायी रूप से रोकना और स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाना है।
30 दिनों तक रुक सकते हैं हमले
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में ईरान और अमेरिका दोनों 30 दिनों तक सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हो सकते हैं। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारी बड़े मुद्दों पर विस्तृत बातचीत जारी रखेंगे। हालांकि समझौते की भाषा और शर्तों को लेकर अभी भी कई दौर की बातचीत बाकी है।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
बातचीत में सबसे अहम मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे और परमाणु गतिविधियों पर लंबी रोक लगाए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी पक्ष की मांग है कि:
- ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपे
- 3 प्रमुख परमाणु केंद्र बंद करे
- अगले 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन रोके
हालांकि ईरान ने इसका वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है। तेहरान का कहना है कि वह कुछ यूरेनियम को कम संवर्धित स्तर पर ला सकता है और बाकी स्टॉक रूस जैसे किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर जोर
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में तीन बड़े बिंदुओं पर खास ध्यान दिया गया है:
- ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी रोक हटाना
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से व्यापारिक जहाजों के लिए खोलना
- दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम लागू करना
दुनिया की तेल सप्लाई पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां तनाव कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अगले 30 दिनों में बड़े फैसलों की उम्मीद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य और विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों को लेकर चर्चा आगे बढ़ सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह अस्थायी समझौता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम कर पाएगा या नहीं।
