भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी उतार-चढ़ाव के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 516 अंक टूटकर 77 हजार 328 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 150 अंक गिरकर 24 हजार 176 पर पहुंच गया। बाजार में दबाव की सबसे बड़ी वजह देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India यानी SBI के तिमाही नतीजे रहे, जिसके बाद बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।

SBI का शेयर करीब 6 प्रतिशत तक लुढ़क गया। इसका असर पूरे बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा और HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। वहीं कोल इंडिया में भी कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर एशियन पेंट्स, अपोलो हॉस्पिटल, टाटा कंज्यूमर, अडानी पोर्ट्स और टाइटन जैसे शेयरों में खरीदारी ने कुछ राहत देने की कोशिश की।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो PSU बैंक इंडेक्स सबसे ज्यादा टूटा और इसमें करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक, मेटल, पावर और रियल्टी सेक्टर में भी दबाव बना रहा। हालांकि IT, FMCG और हेल्थकेयर सेक्टर ने बाजार को संभालने की कोशिश की।
वैश्विक संकेतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सैन्य गतिविधियों की खबरों से दुनियाभर के बाजारों में सतर्कता बढ़ गई। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
हालांकि बड़ी गिरावट के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त में रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और बेहतर वैल्यूएशन के चलते निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप शेयरों में बनी हुई है।
फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी।
