Hormuz तनाव के बीच अमेरिका–ईरान आमने-सामने, इस्लामाबाद में शांति वार्ता पर संशय

इस्लामाबाद/तेहरान/वॉशिंगटन:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में खिंचाव जारी है। इसी बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार (11 अप्रैल 2026) को प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं, हालांकि ईरान ने वार्ता दल के पहुंचने की खबरों को खारिज कर दिया है।

इस्लामाबाद के हाई-सिक्योरिटी रेड ज़ोन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संसद, सरकारी इमारतों, दूतावासों और बड़े होटलों की ओर जाने वाले रास्तों को सील कर दिया गया है, जिससे संभावित वार्ता के मद्देनज़र किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।


होर्मुज पर टकराव तेज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों से शुल्क वसूल रहा है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हो रहा है तो ईरान को इसे तुरंत बंद करना चाहिए।

वहीं ईरान की ओर से सख्त रुख अपनाया गया है। देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने साफ कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने “वैध अधिकारों” से पीछे नहीं हटेगा।


वार्ता पर असमंजस
ईरान की सरकारी एजेंसी तसनीम के मुताबिक, इस्लामाबाद में ईरानी वार्ता दल के पहुंचने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। सूत्रों ने कहा कि जब तक अमेरिका लेबनान में युद्धविराम की शर्तों का पालन नहीं करता और इज़राइल के हमले जारी हैं, तब तक किसी भी तरह की बातचीत स्थगित रहेगी।


युद्धविराम पर भी संशय
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस मौजूदा स्थिति को “युद्धविराम” मानने को तैयार नहीं है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी “उंगलियां ट्रिगर पर हैं”, यानी स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।


निष्कर्ष
कुल मिलाकर, एक ओर जहां पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास और सख्त बयानों के चलते बातचीत की संभावनाएं अनिश्चित नजर आ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

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