हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी से हर महीने PF यानी प्रोविडेंट फंड के रूप में पैसा कटता है। यह रकम छोटी जरूर लगती है, लेकिन लंबे समय में यही आपकी सबसे बड़ी रिटायरमेंट सुरक्षा बन सकती है। कई लोग सिर्फ यह जानते हैं कि PF कट रहा है, लेकिन यह नहीं समझते कि EPF और EPS आखिर कैसे काम करते हैं और रिटायरमेंट तक कितना फंड तैयार हो सकता है।

क्या है EPF और EPS?
PF दो हिस्सों में बंटा होता है — EPF (Employee Provident Fund) और EPS (Employee Pension Scheme)।
EPF एक सेविंग फंड है, जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों हर महीने योगदान करते हैं। इस पर सरकार द्वारा तय ब्याज मिलता है, जो फिलहाल करीब 8.25% सालाना है। यही फंड समय के साथ कंपाउंडिंग के जरिए बड़ा बनता जाता है।
वहीं EPS एक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद हर महीने निश्चित पेंशन देना है।
सैलरी से कितना कटता है?
कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA का 12% हिस्सा EPF में जमा होता है। कंपनी भी बराबर योगदान देती है, लेकिन उसका पूरा पैसा EPF में नहीं जाता।
- कर्मचारी का पूरा 12% EPF में जाता है
- कंपनी के 12% में से 8.33% EPS में जाता है
- बाकी 3.67% EPF में जमा होता है
EPS में अधिकतम करीब ₹1,250 प्रति माह तक ही योगदान माना जाता है।
कैसे बनता है करोड़ों का फंड?
अगर कोई कर्मचारी 30 से 35 साल तक लगातार नौकरी करता है और बीच में PF नहीं निकालता, तो कंपाउंडिंग की वजह से EPF बड़ा रिटायरमेंट फंड बन सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक नियमित योगदान और ब्याज के कारण यह रकम ₹2 करोड़ से ₹3.5 करोड़ या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। लेकिन नौकरी बदलने पर PF निकाल लेने से कंपाउंडिंग टूट जाती है और फंड छोटा रह जाता है।
EPS से कितनी मिलेगी पेंशन?
EPS के तहत पेंशन तय फार्मूले से निकलती है। इसमें अधिकतम सैलरी सीमा ₹15,000 मानी जाती है। यही वजह है कि लंबे समय तक नौकरी करने के बाद भी अधिकतर कर्मचारियों को लगभग ₹8,000 से ₹9,000 तक मासिक पेंशन मिलती है।
फिलहाल न्यूनतम पेंशन ₹1,000 है, जिसे बढ़ाकर ₹3,000 करने की मांग लंबे समय से उठ रही है।
पेंशन के लिए जरूरी शर्तें
- कम से कम 10 साल नौकरी जरूरी
- 58 साल की उम्र के बाद पूरी पेंशन
- 50 साल के बाद कम पेंशन के साथ शुरुआत संभव
क्यों जरूरी है PF को समझना?
वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि PF सिर्फ सैलरी से कटने वाला पैसा नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा है। अगर कर्मचारी बीच में पैसा निकालने से बचें और लगातार निवेश जारी रखें, तो रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
