जबलपुर स्टेशन पर समोसे का पेमेंट फेल, चलती ट्रेन से यात्री को उतारा!— डिजिटल इंडिया में इंसानियत हुई ऑफलाइन

मध्य प्रदेश के जबलपुर रेलवे स्टेशन पर घटित एक अविश्वसनीय घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सिर्फ एक समोसे के पेमेंट फेल होने की वजह से एक वेंडर ने चलती ट्रेन से यात्री को कॉलर पकड़कर उतार लिया! घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद रेलवे प्रशासन और आरपीएफ हरकत में आ गए।

🔹 कैसे शुरू हुआ विवाद — “समोसे का पैसा दो, नहीं तो उतर जाओ”

17 अक्टूबर की शाम जबलपुर स्टेशन पर एक यात्री ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद वेंडर से समोसे खरीदने के लिए ऑनलाइन पेमेंट करने की कोशिश की। लेकिन नेटवर्क की दिक्कत के चलते पेमेंट फेल हो गया। ट्रेन छूटने लगी तो यात्री ने समोसे वहीं छोड़कर ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की।

उसी वक्त वेंडर ने यात्री का कॉलर पकड़ लिया और उसे पैसे दिए बिना जाने नहीं दिया। भीड़ के सामने वह यात्री से उलझ पड़ा और कहा — “पेमेंट फेल बोलकर भाग रहे हो? पहले पैसे दो!”

🔹 ट्रेन छूटने लगी, यात्री ने बचाने के लिए दी अपनी स्मार्ट वॉच

ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म से निकल रही थी। घबराए यात्री ने अपनी स्मार्ट वॉच उतारकर वेंडर को दे दी और ट्रेन पकड़ने के लिए दौड़ पड़ा। पूरा वाकया किसी ने कैमरे में कैद कर लिया।
वीडियो में दिखता है कि वेंडर दो प्लेट समोसे हाथ में लिए हुए है और यात्री ट्रेन की ओर दौड़ रहा है।

🔹 वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा

घटना का वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर आया, लोगों ने रेलवे प्रशासन और स्टेशन वेंडर्स की मनमानी पर सवाल खड़े कर दिए।
कई यूज़र्स ने लिखा —

“डिजिटल इंडिया में कैशलेस पेमेंट का नारा दिया जा रहा है, लेकिन सिस्टम फेल होते ही इंसानियत फेल हो जाती है।”

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि रेलवे स्टेशनों पर वेंडर्स के साथ यात्रियों का शोषण आम बात बन गई है, लेकिन अब यह सीमा पार कर चुका है।

🔹 रेलवे प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

वीडियो वायरल होने के बाद DRM जबलपुर ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
आरपीएफ ने आरोपी वेंडर की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया और उसका वेंडिंग लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया गया।
रेलवे की ओर से बयान जारी किया गया है —

“यात्रियों के साथ किसी भी तरह की बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। घटना की जांच जारी है और दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

 यह घटना सिर्फ “समोसे के पैसे” की नहीं है,
यह “व्यवहार, सुरक्षा और सिस्टम की विफलता” की कहानी है।
जहां डिजिटल इंडिया का सपना और इंसानियत की असलियत आमने-सामने खड़ी हैं।

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