कुरुक्षेत्र NIT में छात्रा ने की आत्महत्या, 2 महीने में चौथा मामला — छात्रों का प्रदर्शन, CBI जांच की मांग

कुरुक्षेत्र/हरियाणा: कुरुक्षेत्र स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में एक बी-टेक छात्रा द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने के बाद कैंपस में तनाव का माहौल बन गया है। घटना के विरोध में छात्रों ने देर रात प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

छात्रों का आरोप है कि संस्थान में लगातार बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों के पीछे अकादमिक दबाव और कुछ प्रोफेसरों का व्यवहार जिम्मेदार है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग उठाई है।

लगातार बढ़ रहे सुसाइड के मामले

छात्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों में यह चौथा मामला है। इससे पहले:

  • 9 अप्रैल: प्रियांशु वर्मा (22), बी-टेक थर्ड ईयर छात्र
  • 31 मार्च: पवन कुमार (22), इलेक्ट्रिकल सेकेंड ईयर
  • 16 फरवरी: अंगोद शिवा (19), फर्स्ट ईयर छात्र

इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने एक कमेटी बनाई थी, लेकिन छात्रों का कहना है कि कमेटी अब तक कोई ठोस रिपोर्ट या समाधान नहीं दे पाई।

छात्रों के गंभीर आरोप

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि:

  • प्रोफेसर छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालते हैं
  • विरोध करने पर मार्कशीट रोकने की धमकी दी जाती है
  • संस्थान में “एक लॉबी” सक्रिय है, जो छात्रों को परेशान करती है

छात्रों का यह भी कहना है कि मृत छात्रा का शव काफी देर तक हॉस्टल में लटका रहा, लेकिन समय पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

कैंपस में हंगामा, पुलिस तैनात

घटना के बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में इकट्ठा हो गए और “We Want Justice” के नारे लगाए। हालात को देखते हुए प्रशासन ने मुख्य गेट बंद कर दिया और मीडिया की एंट्री पर रोक लगा दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल और सुरक्षा गार्ड्स को तैनात किया गया है।

पुलिस का बयान

पुलिस अधिकारी विशाल कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। छात्रा के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मॉर्चरी में रखवाया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच और जवाबदेही पर सवाल

लगातार हो रही इन घटनाओं ने संस्थान की कार्यप्रणाली और छात्र कल्याण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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