नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के एक करोड़ से अधिक लोक सेवकों को पत्र लिखकर “नागरिक देवो भव” को हर निर्णय का मूलमंत्र बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि नागरिक ही सर्वोपरि हैं और सरकार का हर कदम जनता की सेवा के लिए समर्पित होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में जोर देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था करुणा, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए। लोक सेवकों को उन्होंने “कर्मयोगी” बताते हुए कहा कि सार्वजनिक सेवा से जुड़े हर व्यक्ति को निरंतर सीखने और खुद को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
12 भाषाओं में जारी किया गया पत्र
यह पत्र सिविल सेवा दिवस (21 अप्रैल) से एक दिन पहले 20 अप्रैल को जारी किया गया, जिसे हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 12 भारतीय भाषाओं में लिखा गया है। पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी चुनौतियों के साथ-साथ नए अवसरों का भी दौर है, जहां तकनीक और नवाचार तेजी से बदलाव ला रहे हैं।
‘आईगॉट कर्मयोगी’ से सीखने पर जोर
प्रधानमंत्री ने ‘आईगॉट कर्मयोगी’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि लोक सेवकों को आजीवन सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशासन के लिए कार्य संस्कृति को समय के अनुरूप ढालना बेहद जरूरी है।
त्योहारों के बीच दिया प्रेरणादायक संदेश
पीएम मोदी ने पत्र में देशभर में मनाए जा रहे त्योहारों—रोंगाली बिहू, विशु, पुथंडू, पोइला बोइशाख, महा बिशुबा पाना संक्रांति और बैसाखी—का जिक्र करते हुए कहा कि ये पर्व आशा और नई शुरुआत के प्रतीक हैं। इसी क्रम में उन्होंने ‘साधना सप्ताह’ को सीखने और आत्मविकास का उत्सव बताया।
‘साधना सप्ताह’ में भागीदारी पर बधाई
प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े सिविल सेवकों को ‘साधना सप्ताह’ में भाग लेने के लिए बधाई दी और इसे प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
(आवाज़ प्लस)
