H-1B वीजा पर 3 साल की रोक का प्रस्ताव, अमेरिकी संसद में विधेयक पेश

वॉशिंगटन: अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। Donald Trump प्रशासन से जुड़े रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने अमेरिकी कांग्रेस में H-1B वीजा कार्यक्रम पर तीन साल की रोक लगाने का विधेयक पेश किया है। इस प्रस्ताव ने विदेशी पेशेवरों, खासकर भारतीय टेक्नोलॉजी कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

क्या है विधेयक का उद्देश्य?
एरिजोना के कांग्रेसमैन एली क्रेन द्वारा पेश किए गए ‘End H-1B Visa Abuse Act of 2026’ का मकसद अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियों को प्राथमिकता देना बताया गया है। रिपब्लिकन सांसदों का आरोप है कि H-1B कार्यक्रम का दुरुपयोग कर कंपनियां सस्ते विदेशी श्रमिकों को नियुक्त कर रही हैं, जिससे अमेरिकी कामगारों के अवसर कम हो रहे हैं।

प्रस्तावित बड़े बदलाव
विधेयक में कई सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं—

  • H-1B वीजा पर 3 साल की अस्थायी रोक
  • वार्षिक कोटा 65,000 से घटाकर 25,000 करना
  • न्यूनतम वेतन 2 लाख डॉलर प्रति वर्ष तय करना
  • लॉटरी सिस्टम खत्म कर वेतन-आधारित चयन लागू करना
  • नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना होगा कि उन्हें योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिले
  • H-1B धारकों को एक से अधिक नौकरी करने की अनुमति नहीं
  • थर्ड-पार्टी स्टाफिंग कंपनियों पर रोक

ग्रीन कार्ड और OPT पर भी असर
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि H-1B वीजा को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) में बदलने की अनुमति न दी जाए। साथ ही Optional Practical Training (OPT) कार्यक्रम को समाप्त करने और गैर-आप्रवासियों को स्टेटस बदलने से पहले देश छोड़ने की शर्त भी जोड़ी गई है।

भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा असर
H-1B वीजा का सबसे ज्यादा उपयोग अमेरिकी टेक कंपनियां करती हैं और इसमें भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और डॉक्टरों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में यह प्रस्ताव सीधे तौर पर भारतीय प्रतिभाओं को प्रभावित कर सकता है।

रिपब्लिकन सांसदों का पक्ष
कांग्रेसमैन एली क्रेन ने कहा कि सरकार को अमेरिकी नागरिकों के हित में काम करना चाहिए, न कि बड़ी कंपनियों के मुनाफे के लिए। वहीं पॉल गोसार ने इसे “अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा” की दिशा में जरूरी कदम बताया।

अभी क्या होगा आगे?
यह विधेयक फिलहाल प्रस्ताव के रूप में पेश किया गया है। इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त करनी होगी।

अगर यह विधेयक पास होता है, तो H-1B वीजा प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर वैश्विक टैलेंट मूवमेंट और खासतौर पर भारतीय पेशेवरों पर स्पष्ट रूप से पड़ेगा।

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