गोरखपुर पीएसी कैंप में महिला सिपाहियों का बवाल: खुले में नहाने, बदइंतजामी और अभद्रता का आरोप Ask ChatGPT

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित 26वीं बटालियन पीएसी ट्रेनिंग कैंप में चल रही महिला सिपाही भर्ती की ट्रेनिंग उस समय विवादों में आ गई जब करीब 600 महिला रिक्रूट्स ने ट्रेनिंग शर्तों के खिलाफ खुलेआम विरोध प्रदर्शन किया। महिलाओं ने बिजली-पानी की भारी किल्लत, खुले में नहाने की मजबूरी, और अधिकारियों द्वारा अपमानजनक व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

यह विरोध न सिर्फ संवेदनशील महिला सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, बल्कि यह बताता है कि सिस्टमिक खामियों को लेकर महिला सिपाही अब चुप नहीं बैठने वालीं।

💥 600 रिक्रूट्स, पर सुविधा केवल 250 के लिए

महिला सिपाहियों का कहना है कि कैंप में सिर्फ 250 सिपाहियों की व्यवस्था है लेकिन बिना सोचे-समझे 600 से अधिक लड़कियों को बुला लिया गया। इसके चलते न तो उन्हें सही जगह मिल पा रही है, और न ही मूलभूत ज़रूरतें।

शौचालय और स्नानघर न सिर्फ अपर्याप्त हैं, बल्कि खुले में नहाने की मजबूरी ने उनकी निजता और गरिमा को गंभीर रूप से ठेस पहुंचाई है।

🗣️ महिला रिक्रूट्स की आपबीती:

  • “बिजली नहीं, पंखा नहीं, पीने का पानी तक नहीं है। गर्मी और बदबू से बेहाल हैं।”
  • “हम खुले में नहा रही हैं, कोई सुरक्षा नहीं। बाथरूम भर गए हैं।”
  • “हमें बुलाया गया, लेकिन यहाँ कोई भी मानवीय सुविधा नहीं दी गई।”
  • “एक अधिकारी ने गंदी-गंदी गालियां दीं। क्या हम इंसान नहीं हैं?”

इस विरोध के दौरान कई महिला सिपाही रोती हुई नजर आईं, एक युवती बेहोश तक हो गई। भावनाओं का यह विस्फोट दर्शाता है कि उनके साथ कितना अन्याय हुआ।

🧑‍⚖️ प्रशासन का जवाब: राहत या लीपापोती?

इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी (लखनऊ) ने कहा:

“तकनीकी कारणों से बिजली और पानी की समस्या हुई थी, जिसे तुरंत ठीक कर दिया गया है।”
“बाथरूम में कैमरे की बात पूरी तरह झूठी पाई गई है।”
“पीटीआई द्वारा अपमानजनक भाषा प्रयोग करने पर उसे निलंबित किया गया है।”

हालांकि सवाल यह है कि तकनीकी खराबी की आड़ में प्रशासनिक लापरवाही को कब तक छुपाया जाएगा?

राजनीतिक प्रतिक्रिया:

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा:

“गोरखपुर से महिला पुलिस रिक्रूट्स के ट्रेनिंग सेंटर की बदइंतजामी के दुर्भाग्यपूर्ण समाचार आ रहे हैं। न बिजली है, न पानी, न गरिमापूर्ण स्नानालय। जब मुख्य नगरी का ये हाल है तो शेष का क्या कहना? नारी वंदना भाजपा का जुमला है।”

📌 मुख्य सवाल जो उठते हैं:

  1. क्या 600 महिलाओं को बुलाने से पहले उनकी सुविधा की योजना बनाई गई थी?
  2. जब पुलिस प्रशिक्षण का उद्देश्य अनुशासन और गरिमा है, तो ऐसी अपमानजनक स्थितियां कैसे बनीं?
  3. क्या महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारे तक सीमित रह गया है?

🎯 निष्कर्ष: महिला पुलिस बनने से पहले ही अपमानित क्यों?

गोरखपुर की यह घटना एक अलार्म बेल है – न सिर्फ उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रशासन के लिए, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए। जिस राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, और सशक्तिकरण की बातें की जाती हैं, वहां की महिला सिपाही खुले में नहा रही हैं, गालियां सुन रही हैं, और बेहोश हो रही हैं। यह एक गंभीर संस्थागत विफलता है।

अगर प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई नहीं करता और यह सोचकर टाल देता है कि “सब संभाल लिया गया”, तो आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश का कारण बन सकता है।

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