बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव में महायुति की जीत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों के साथ 5-स्टार होटल में हुई बैठक के बाद दलबदल और अंदरूनी खींचतान की अटकलें तेज हो गई थीं। अब इन तमाम चर्चाओं पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ कहा है कि दलबदल का कोई सवाल ही नहीं उठता और मुंबई में महायुति का महापौर सर्वसम्मति से चुना जाएगा।
शिंदे की बैठक पर क्या बोले CM फडणवीस
मुख्यमंत्री फडणवीस ने एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा,
“जैसे मैं पुणे में नवनिर्वाचित पार्षदों से मुलाकात कर रहा हूं, वैसे ही एकनाथ शिंदे भी नए पार्षदों से मिल रहे हैं। उन्होंने सभी को बैठक के लिए बुलाया होगा। इसमें दलबदल का कोई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।”
फडणवीस ने साफ तौर पर कहा कि महायुति के भीतर सब कुछ सामान्य है और गठबंधन में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है।
महापौर चयन पर जल्द होगा फैसला
सीएम फडणवीस ने आगे बताया कि जल्द ही वह, एकनाथ शिंदे और अन्य वरिष्ठ नेता आपस में बैठक करेंगे। इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि मुंबई का महापौर कौन होगा और कितने समय के लिए होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय आपसी सहमति से लिया जाएगा।
“हमारे बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। महायुति एकजुट है और सभी फैसले मिल-बैठकर लिए जाएंगे।”
BMC चुनाव का गणित
गौरतलब है कि BMC की कुल 227 सीटों में से महायुति गठबंधन को 119 सीटें मिली हैं।
- बीजेपी: 89 सीटें
- शिवसेना (शिंदे गुट): 29 सीटें
हालांकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन महापौर चुनने के लिए उसे शिवसेना के समर्थन की जरूरत होगी। इसी वजह से शिंदे गुट की भूमिका अहम मानी जा रही है और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
क्या शिंदे रखेंगे बड़ी शर्तें?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एकनाथ शिंदे ढाई साल के लिए महापौर पद समेत BMC की कई शक्तिशाली समितियों में हिस्सेदारी की मांग कर सकते हैं। हालांकि, शिवसेना ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
शिवसेना नेताओं का कहना है कि 5-स्टार होटल में हुई बैठक कोई राजनीतिक सौदेबाजी नहीं थी, बल्कि नवनिर्वाचित पार्षदों के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का हिस्सा थी।
राजनीतिक संदेश साफ
CM फडणवीस के बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि महायुति नेतृत्व फिलहाल किसी भी विवाद को हवा नहीं देना चाहता। दलबदल की चर्चाओं को खारिज कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि गठबंधन पूरी तरह स्थिर है और BMC में सत्ता संचालन को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं है।
अब सबकी निगाहें महायुति की आगामी बैठक पर टिकी हैं, जहां मुंबई के महापौर पद पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
