मेरठ टोल प्लाजा पर भारतीय सेना के जवान से मारपीट: दोहराई गई हिंसा ने उठाए गंभीर सवाल

मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर भारतीय सेना के एक जवान के साथ हुई मारपीट की घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और सामाजिक अनुशासन को लेकर गहरी चिंता भी जगाती है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि टोल प्लाजा कर्मियों और कुछ स्थानीय गुंडों ने मिलकर जवान को घेर लिया और उसके साथ हाथापाई की।

पिछली घटनाओं से जुड़ा पैटर्न

यह पहली बार नहीं है जब भूनी टोल प्लाजा पर हिंसक घटना सामने आई हो। 21 अप्रैल, 2025 को इसी स्थान पर टोल कर्मियों द्वारा एक शादी के जुलूस पर हमले की रिपोर्ट हुई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि इस जगह पर हिंसा और आक्रामक व्यवहार का एक खतरनाक पैटर्न विकसित हो चुका है।

डेटा बताता है बढ़ती हिंसा

भारत में टोल प्लाजा पर हिंसा को लेकर कोई सीधा अकादमिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है। लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2023 के अनुसार, सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े अपराधों (जिसमें दंगा – धारा 191 BNS – शामिल है) में 12% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह तथ्य इस घटना को एक बड़े सामाजिक तनाव और अव्यवस्थित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन से जोड़ता है।

जवान की ड्यूटी और संवेदनशील भू-राजनीतिक एंगल

घटना का दूसरा पहलू और भी गंभीर है। पीड़ित जवान कश्मीर में ड्यूटी ज्वॉइन करने के लिए यात्रा पर था। कश्मीर लंबे समय से सैन्य और नागरिक संबंधों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र रहा है। 2022 में श्रीनगर में सेना और नागरिकों के बीच हुई झड़प (इंडिया टुडे फैक्ट चेक, 2025) इस बात का उदाहरण है कि ऐसे विवाद कभी-कभी स्थानीय गुस्से या अवसरवाद का परिणाम हो सकते हैं। इस घटना को केवल “रोड रेज” या “व्यक्तिगत विवाद” मानना स्थिति की गंभीरता को कम करके आंकना होगा।

बड़े सवाल और निहितार्थ

  • क्या टोल प्लाजा सुरक्षा और अनुशासन की जगह हैं या हिंसा और दबंगई का अड्डा बनते जा रहे हैं?
  • क्या राज्य सरकार और टोल प्रबंधन कंपनियां पर्याप्त निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित कर रही हैं?
  • और सबसे अहम सवाल: जब देश का एक जवान, जो सीमा पर सुरक्षा का जिम्मा उठाता है, अपने ही राज्य में असुरक्षित महसूस करे तो आम नागरिक कितना सुरक्षित है?

निष्कर्ष

मेरठ की यह घटना केवल एक जवान पर हमला नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों पर चोट है। NCRB के आंकड़े बताते हैं कि भारत में सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ज़रूरत है कि टोल प्लाजा जैसी जगहों पर सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए, निगरानी कैमरों और पुलिस की चौकसी को बढ़ाया जाए, और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई हो।

क्योंकि अगर उन जगहों पर भी सुरक्षा न हो जहाँ हर नागरिक रोज़ाना से गुजरता है, तो यह सीधे-सीधे लोकतंत्र और सामाजिक अनुशासन पर सवाल है।

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