ऑनलाइन गेम बना जानलेवा: 12 वर्षीय बच्चे ने की आत्महत्या, 3000 रुपये की ट्रांजेक्शन बनी वजह

ऑनलाइन गेमिंग की लत और उसके गंभीर परिणामों को लेकर एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में मात्र 12 साल के एक बच्चे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चा आठवीं कक्षा का छात्र था और उसे मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने की आदत थी।

यह घटना न केवल एक परिवार की टूटती उम्मीदों की कहानी है, बल्कि समाज के लिए एक जागरूकता की चेतावनी भी है कि किस तरह डिजिटल लत बच्चों के जीवन को निगल रही है।

🧩 क्या हुआ था उस दिन?

घटना 31 जुलाई की है। मृतक बच्चा घर पर था और अपनी मां के मोबाइल से गेम खेल रहा था। गेम के दौरान उसकी मां के बैंक खाते से ₹3000 कट गए। जैसे ही मां को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने बेटे से इस बारे में बातचीत की और उसे समझाने की कोशिश की।

बच्चा कुछ नहीं बोला। चुपचाप अपने कमरे में चला गया। जब काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला गया, तो परिजनों को संदेह हुआ। जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का मंजर दिल दहला देने वाला था — बच्चा पंखे से लटका हुआ था।

परिजन तत्काल उसे अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

🎂 एक दिन पहले मनाया था जन्मदिन

इस घटना को और भी वज्रपात जैसा बना देती है एक और बात — 30 जुलाई को ही पूरे घर में बच्चे का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया था। किसी को यह अंदेशा नहीं था कि सिर्फ 24 घंटे बाद वही घर मातम में डूब जाएगा।

📂 पुलिस जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। जांच अधिकारी राजेश जैन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का कारण ऑनलाइन गेमिंग और पैसे की ट्रांजेक्शन को माना जा रहा है।

शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, और पुलिस हर पहलू से जांच में जुटी है — यह जानने के लिए कि बच्चा किस गेम में इतना डूबा हुआ था कि आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।

🔊 परिवार की गुहार

मृतक के ताऊ ने सरकार से आवेदन किया है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन गेम्स पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए।

उनका कहना है कि,

सरकार को अब बच्चों के लिए ऑनलाइन गेम्स को कंट्रोल करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। यह सिर्फ एक घर की नहीं, हजारों परिवारों की पीड़ा बनती जा रही है।

📱 डिजिटल लत: समाज के लिए चेतावनी

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  1. क्या हमारे बच्चे डिजिटल प्लेटफॉर्म के खतरे समझ पा रहे हैं?
  2. क्या अभिभावकों को डिजिटल आदतों पर पहले से निगरानी नहीं रखनी चाहिए?
  3. क्या ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती?

💬 विशेषज्ञों की राय

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार,

  • बच्चों का संवेदी तंत्र नाजुक होता है।
  • आर्थिक नुकसान, डांट या अपराधबोध उन्हें घातक कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
  • ऑनलाइन गेम्स में आभासी दुनिया इतनी आकर्षक होती है कि वह बच्चे की असल ज़िंदगी से जुड़ाव को कमजोर कर देती है।
Click to Un-Mute
WhatsApp icon
+919335693356
Contact us!
Phone icon
+919335693356