झारखंड के खूंटी से आई यह खबर समाज और प्रशासन दोनों को गहरी सोच में डाल रही है। एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की ने बच्ची को जन्म दिया है। यह लड़की अपने 16 वर्षीय प्रेमी के साथ लिव-इन में रह रही थी। दोनों के परिवारों ने इसे मंजूरी दी थी क्योंकि आदिवासी समाज में “धुकु” नाम की परंपरा है, जिसमें बिना शादी के लड़का-लड़की साथ रह सकते हैं।
📍 घटना की पृष्ठभूमि
- लड़की नौवीं कक्षा में पढ़ती थी और पढ़ाई के लिए किराए के मकान में रहती थी।
- वहीं उसकी मुलाकात पास के गांव के लड़के से हुई। दोस्ती गहरी हुई और वह प्रेग्नेंट हो गई।
- परिवार और समाज की सहमति से दोनों साथ रहने लगे।
- 7 महीने की प्रेग्नेंसी के दौरान उसने अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया।
🏥 मेडिकल स्थिति
- मुरहू सीएचसी में जांच के बाद लड़की को खूंटी सदर अस्पताल रेफर किया गया।
- डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव कराया।
- बच्ची का जन्म समय से पहले हुआ है, इसलिए दोनों को निगरानी में रखा गया है।
⚠️ नाबालिग प्रेग्नेंसी के खतरे
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार –
- कम उम्र में गर्भधारण मां की जान के लिए गंभीर खतरा है।
- प्रीमैच्योर बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं अधिक होती हैं।
- नाबालिग उम्र में मातृत्व शिक्षा और भविष्य दोनों पर भारी पड़ता है।
🏛️ प्रशासन की चुनौती
- चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर अल्ताफ खान ने कहा कि अब जिले के सभी 86 ग्राम पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
- लक्ष्य होगा कि किशोर-किशोरियों को समझाया जाए कि नाबालिग उम्र में रिश्ते और मातृत्व खतरनाक हैं।
- अधिकारियों का मानना है कि केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि समाज के बुजुर्ग, पंचायत, शिक्षक और परिवार भी बदलाव की जिम्मेदारी लें।
🔎 बड़ी तस्वीर
यह घटना केवल खूंटी का मामला नहीं है। यह दिखाती है कि ग्रामीण और आदिवासी समाज में अब भी बाल विवाह, नाबालिग प्रेग्नेंसी और यौन शिक्षा की कमी जैसी समस्याएं मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि –
- स्कूल स्तर पर यौन शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएं।
- परंपरा का सम्मान करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है।
