राजस्व वसूली में घोर लापरवाही या सुनियोजित खेल? पद पर तैनाती से पहले ही तकनीकी अधीक्षण अभियंता को थमा दिया नोटिस

लखनऊ (गोमती नगर)।
मध्यांचल डिस्कॉम के गोमती नगर जोन में प्रशासनिक विवेक और नियमों को दरकिनार करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। राजस्व वसूली जैसे विशुद्ध बिलिंग से जुड़े प्रकरण में अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) को नोटिस जारी कर दिया गया—वह भी उस अवधि के लिए, जब संबंधित अधिकारी उस पद पर तैनात ही नहीं थे। हैरानी की बात यह है कि जिन दायित्वों की जिम्मेदारी बिलिंग विंग पर आती है, उन पर कार्रवाई के बजाय तकनीकी अधिकारी को कटघरे में खड़ा किया गया।

यह कार्रवाई स्वयं मुख्य अभियंता (गोमती नगर जोन) सुशील गर्ग के स्तर से की गई बताई जा रही है, जिससे विभागीय निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पदभार बाद में, जिम्मेदारी पहले?

सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियर नवीन चंद्र प्रसाद ने 1 दिसंबर 2025 को अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) का कार्यभार ग्रहण किया। इसके बावजूद नवंबर 2025 की राजस्व वसूली को लेकर उन्हें नोटिस जारी किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है—क्योंकि जिस अवधि में अधिकारी पद पर ही नहीं थे, उसकी जिम्मेदारी तय करना नियमों के खिलाफ है।

बिलिंग विंग को क्यों नहीं नोटिस?

नोटिस में जिन आरोपों का उल्लेख है—

  • राजस्व वसूली में रुचि का अभाव
  • नेवर-पेड/लॉन्ग-अनपेड उपभोक्ताओं पर कार्रवाई न होना
  • रीडिंग आधारित बिलिंग में विफलता
  • विद्युत चोरी रोकने में नाकामी

ये सभी दायित्व अधीक्षण अभियंता (बिलिंग) के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद बिलिंग विंग के जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई या नोटिस नहीं, जबकि तकनीकी अधिकारी को कठघरे में खड़ा कर दिया गया।

नोटिस की भाषा पर भी सवाल

नोटिस में दिसंबर 2025 के लिए ₹109.35 करोड़ का मासिक लक्ष्य हर हाल में पूरा करने का दबाव डाला गया है और लक्ष्य न पाने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जानकारों के अनुसार, तकनीकी अधीक्षण अभियंता का दायित्व संचालन व तकनीकी व्यवस्थाओं तक सीमित होता है—सीधी राजस्व वसूली उनका कार्यक्षेत्र नहीं

‘अंधेर नगरी–चौपट राजा’ जैसा प्रशासन

विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला साधारण प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि
“जिम्मेदारी किसी और की, कार्रवाई किसी और पर”
जैसी चयनात्मक कार्यशैली का उदाहरण है। नए और तकनीकी अधिकारी को आसान निशाना बनाकर असली जिम्मेदारों को बचाने का आरोप लगाया जा रहा है।

मुख्य अभियंता की भूमिका सवालों के घेरे में

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्य अभियंता सुशील गर्ग की प्रशासनिक भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं—

  • क्या कार्रवाई जानबूझकर चयनात्मक है?
  • क्या तकनीकी अधिकारी को “बलि का बकरा” बनाया गया?
  • क्या बिलिंग विंग को संरक्षण दिया जा रहा है?

यूपीपीसीएल मीडिया की मांग

मामले को लेकर यूपीपीसीएल मीडिया ने स्पष्ट मांग की है कि—

  1. तर्कहीन और अवैध नोटिस तत्काल निरस्त किया जाए।
  2. यह स्पष्ट किया जाए कि बिलिंग प्रकरण में तकनीकी अभियंता को नोटिस किस आधार पर दिया गया।
  3. मुख्य अभियंता सुशील गर्ग की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  4. कार्रवाई वास्तविक जिम्मेदारों पर हो, न कि किसी को बलि का बकरा बनाया जाए।

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